डॉ. कुमावत स्वामी आचार्य संत श्री प्रदीप आनंद अलंकरण से विभूषित

उदयपुर 3 अप्रेल! अखिल भारतीय नववर्ष समारोह समिति के राष्ट्रीय सचिव डॉ प्रदीप कुमावत को सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए आचार्य संत श्री प्रदीप आनंद अलंकरण से विभूषित किया गया!

इस अवसर पर रतलाम के महाराजा रामलक्ष्मण सिंह राठौड़ तथा श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा बिजोलाई बालाजी आश्रम जोधपुर के श्री श्री 1008 महामंडलेष्वर सोमेश्वर गिरी जी महाराज ने डॉ प्रदीप कुमावत को संत श्री स्वामी प्रदीपानंद आचार्य की पद्मी से विभूषित करते हुए प्रशस्ति पत्र और पदवी प्रदान की।
इस गौरवमयी समारोह में श्री श्री 1008 महामंडलेष्वर सोमेश्वर गिरी जी महाराज संत श्री ने उद्घोषणा करते हुए कहा, “केवल भगवा वस्त्र धारण करना ही संतत्व का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज और सनातन संस्कृति के निरंतर संवर्धन हेतु अविरल प्रयत्न करने वाले व्यक्तियों को ही सच्चे संत शिरोमणि के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि डॉ कुमावत ने पिछले चालीस वर्षों से अनवरत सनातन धर्म की सेवा करते हुए न केवल मेवाड़ में, बल्कि पूरे राजस्थान और भारतवर्ष में एक अद्भुत मिसाल कायम की है, जिसके द्वारा नववर्ष की नई उमंग से समस्त विश्व को लाभान्वित किया गया है।
इसी अवसर पर महाराजा रामलक्ष्मण सिंह राठौड़ ने भी वक्तव्य में उल्लेख किया कि अतीत में अंग्रेजों और मुगलों के शासनकाल में संवत्सर मनाने की परंपरा पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस पर प्रतिबंध के पश्चात्, स्वतंत्रता के बाद भी यह परंपरा विलुप्तप्राय हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ प्रदीप कुमावत के अतुलनीय प्रयासों ने इस विस्मरण की अवस्था को स्मरण की नई लहर में परिवर्तित कर दिया है।
इस प्रकार, श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा बिजोलाई बालाजी आश्रम जोधपुर के श्री श्री 1008 महामंडलेष्वर सोमेश्वर गिरी जी महाराज सम्पूर्ण संत समाज जोधपुर के आश्रम के सहयोग से, डॉ प्रदीप कुमावत के योगदान को उनके नाम के साथ महाराजा रतलाम महाराजा रामलक्ष्मण सिंह राठौड़ द्वारा अभिभूत किया गया है। यह समारोह सनातन संस्कृति के प्रति उनके अटूट समर्पण और अथाह सेवा का एक शानदार प्रमाण है, जिसने अतीत की विरासत को पुनः जीवंत किया और भविष्य के लिए एक प्रेरणास्पद मार्ग प्रशस्त किया है।

By Udaipurviews

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