News

इको सेंसेटिव जोन के पेच में फंसे 1700 करोड़ के प्रोजेक्ट

-वन विभाग से मिले एनओसी तो नगर विकास प्रन्यास दे स्वीकृति
– सज्जनगढ वन्य जीव क्षेत्र में घोषित है इको सेंसेटिव जोन

उदयपुर। उदयपुर के बने मास्टर प्लान और गत वर्षों उसमें किए गए संशोधन के साथ ही वन विभाग की ओर से लाए इको सेंसेटिव जोन के पेच में 1700 करोड़ से भी ज्यादा के प्रस्तावित प्रोजेक्ट अटके होने के साथ ही शहर का भावी विकास को विराम लगा हुआ है। वन विभाग लंबित प्रोजेक्ट्स पर एनओसी दे तो नगर विकास प्रन्यास उन पर स्वीकृति दे। इसी पेच में शहर में आने वाले सौ से ज्यादा भावी बड़े प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं।
शहर और शहर से बाहर अन्य राज्यों के बड़े बिल्डर्स और डवलपर्स ने 100 से ज्यादा बड़े-बड़े करोड़ों रुपए लागत के प्रोजेक्ट बनाकर उनके निर्माण के लिए नगर विकास प्रन्यास में फाइल कर रखे हैं। ये प्रोजेक्ट्स उदयपुर शहर के विश्व स्तर पर पर्यटन क्षेत्र में पाई ख्याति से यहां भविष्य में बड़े स्तर पर पर्यटन व्यवसाय की प्रबल संभावनाओं को देखते हुए लाए गए हैं। लेकिन इसमें वन विभाग द्वारा सज्जनगढ़ वन क्षेत्र के लिए वर्ष 2017 में बनाया गया इको सेंसेटिव जोन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। प्रोजेक्टस डवलपर्स का कहना है कि इको सेंसेटिव जोन घोषित करने के लिए फरवरी 2017 जारी किया गया नेशनल गजट किसी स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं किया गया, जिसके चलते उदयपुर की आम जनता को सज्जनगढ़ वन क्षेत्र को सेंसेटिव जोन घोषित किए जाने का पता ही नहीं चला और इससे अनजान रहे। इस कारण स्थानीय आम जनता एवं बिल्डर-डवलपर्स उस पर कोई आपत्ति या सुझाव नहीं दे सके। बीते समय में डवलपर्स ने भविष्य के पर्यटन विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उदयपुर मास्टर प्लान-2031 के मद्देनजर 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स बनाकर स्वीकृति के लिए नगर विकास प्रन्यास में फाइले लगाई तो इको सेंसेटिव जोन बताकर प्रन्यास के अधिकारियों ने स्वीकृति देने मेें हाथ खड़े कर दिए। अब जिला कलक्टर की अध्यक्षता वाली जिला प्रशासन समिति की बैठक काफी लम्बे समय से नहीं होने से प्रोजेक्ट्स अटके पड़े हैं।
प्रोजेक्ट्स पास होंगे तो मिलेगा रोजगार और राजस्व
अटके पड़े 1700 करोड़ रुपए से भी ज्यादा लागत के प्रोजेक्ट्स पर यदि निर्माण स्वीकृति मिलती है तो उनकी क्रियान्विति के लिए उदयपुर शहर से बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार सृजित होगा। प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे तो यहां देश-दुनिया से पर्यटकों की आवक होगी और उससे राज्य सरकार को राजस्व के साथ-साथ देश को विदेशी मुद्रा भी अर्जित होगी।
यह है इको सेंसेटिव जोन
उदयपुर शहर का मास्टर प्लान 2031 राज्य सरकार ने 24 सितम्बर 2013 को स्वीकृत एवं अधिसूचित किया। इस स्वीकृत और अधिसूचित मास्टर प्लान के प्रावधानों को नजर अंदाज कर केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उदयपुर के सज्जनगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य के इर्द-गिर्द के 250 मीटर से 5 किमी. तक की दूरी के क्षेत्र की 13 फरवरी 2017 को अधिसूचना जारी कर पारिस्थितिक संवेदी जोन (इको सेंसेटिव जोन) अधिसूचित कर दिया। इस जोन के रखरखाव एवं विकास के प्रावधान उदयपुर के स्वीकृत एवं अधिसूचित मास्टर प्लान के प्रावधानों के विपरित है। ऐसी स्थिति में उदयपुर शहर के सूनियोजित विकास में विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न होकर कानूनन पेदा हो गई है।
यूं भी उलझा हुआ है इको सेंसेटिव जोन
सज्जनगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की जारी अधिसूचना में उपबंध 4 में इको सेंसेटिव जोन में आने वाले गावों की दी गई सूची अधूरी है। इसमें क्रम संख्या 2,5,7,8 व 9 में वर्णित गांव क्रमश: सनातोरतम, सज्जनगढ़, दरारा, राताखेत व ओदी नाम से कोई राजस्व गांव नहीं है। राजस्व गांव सीसारमा, कोडियात, नाािावतों का गुड़ा, लियो का गुड़ा, फेरनियों का गुड़ा, मोरवानिया आदि महतवपूर्ण गांव, जो कि इको सेंसेटिव जोन में स्थित है, उन्हें अधिसूचित ही नहीं किया गया।
मौके से भिन्न है नक्शा
इको सेंसेटिव जोन में जो सीमा दर्शाई गई है उसमें दक्षिण दिशा वाली सीमा शिल्पग्राम तिराहा से शुरु होकर आगे सड़क के साथ घूमकर राजीव गांधी पार्क तक पहुंचती है, आगे हवाला गांव से पार्क सीमा के साथ आगे बढ़ते हुए हवाला गांव की ओर मुस्लिम कब्रिस्तान तक बाहर की तरफ पहुंची है। पश्चिमी सीमा के साथ आगे बढ़ते हुए हवाला घेर के उत्तर पूर्वी कोने के कब्रिस्तान तक पहुंचती है। आगे सज्जनगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की दक्षिण दिशा की ओर से पूर्वी दीवार के साथ चारदीवारी के साथ, हवाला के घेर के साथ आगे बढ़ती हुई त्रि-जंक्शन रोड के पॉवर हाउस तक पहुंचती है। इसके बाद आगे बढ़ती हुई रामपुरा चौराहा तक पहुंचती है। परंतु अधिसूचना के साथ सलंग्न नक्शे में दर्शाई गई सीमा विवरण से मिलान नहीं होकर उसमें काफी भिन्नता है। दर्शाई सीमा दीवार, इको सेंसेटिव जोन व जीबीएस कार्डिनेट्स में आपस में मिलान नहीं है।
इनका कहना है…
वन विभाग से एनओसी मिले तो
-इको सेंसेटिव जोन का मामला वन विभाग से संबंधित है। वन विभाग से एनओसी मिले तो ही नगर विकास प्रन्यास से लंबित प्रोजेक्ट्स पर स्वीकृति जारी करना संभव हो सकता है।-बालमुकुन्द असावा, सचिव नगर विकास प्रन्यास उदयपुर।
बैठक बुलाने कलक्टर को भेजी है नोटशीट
-इको सेंसेटिव जोन में प्रोजेक्ट्स पर एनओसी के लिए प्राप्त आवेदनों पर विचार के लिए जिला प्रशासन समिति की बैठक के लिए जिला कलक्टर को नोटशीट भेजी हुई है। जल्द ही बैठक बुला लेने की उम्मीद है, उसमें आवेदनों का निस्तारण करा दिया जाएगा।-अजित उचोई, उपवन संरक्षक (वन्य जीव) सज्जनगढ़ फोरेस्ट उदयपुर

साभार: दैनिक नव ज्योति

× How can I help you?